Friday, April 3, 2015

This is definitely NOT a solution for women empowerment in India....






दीपिका ने जितने भी अपने चॉइस गिनवाये हैं, अधिकतर बड़ी ही सुपरफ़्लुएस सी चॉइसेस हैं। उनकी चॉइस कपड़ों की चॉइस से शुरू होती है और खत्म होती है फ्री सेक्स, समलैंगिगता और एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स की वकालत करते हुए। कम से कम ये चॉइसेस एक आम हिन्दुस्तानी औरत/ लड़की की चॉइस नहीं हैं, न ही उस विडिओ में एक भी आम हिन्दुस्तानी लड़की/औरत नज़र आई है।  ये सारे चॉइस ब्रांडेड कपडे पहनी हुई उन महिलाओं की हैं जो अपनी चॉइसस के सामने दूसरों की चॉइसेस को घुटने टिकवा कर मानतीं हैं।   

हाँ अगर दीपिका ये कहतीं कि हर हिन्दुस्तानी लड़की/औरत को स्वावलंबन की चॉइस मिलनी चाहिए, पढ़ाई-लिखाई की चॉइस मिलनी चाहिए, कुछ बनने की चॉइस मिलनी चाहिए, ससुराल में बेटी बन कर रहने की चॉइस मिलनी चाहिए, दहेज़ जैसी प्रथा का समूल नाश कर देने की चॉइस मिलनी चाहिए,  तो शायद हर महिला इस विडिओ से ख़ुद को रिलेट कर पाती। फिलहाल तो ये विडिओ 'चॉइस ऑफ़ हाऊ टू यूस वूमन्स ओन बॉडी' बन कर रह गई है । 

एक सामान्य घर की महिला, गाँव की महिला या एक मजदूर महिला के लिए ये प्रॉयरिटी कहाँ है भई कि वो शादी के पहले किसके साथ सोये या शादी के बाद कहाँ रात बसर करे , वो बच्चे पैदा करे या ना करे और फिर यहाँ-वहाँ सोने से वीमेन को एम्पॉवरमेंट कैसे मिल पायेगा, इस बात पर  दीपिका जी विशेष रूप से प्रकाश डालने का कष्ट करतीं तो अच्छा होता । ????  

इस विडिओ को देख कर ऐसा प्रतीत हुआ जैसे वोग मैगज़ीन वालों की दुनिया शरीर से शुरू होती है और शरीर पर ही खत्म हो जाती है। हिन्दुस्तान एक अलग तरह का देश है , यहाँ की समस्याओं  पर बात करने का बीड़ा जब वोग ने उठाया था तो उन्हें यहाँ की दुनिया को भी अच्छी तरह से देख-समझ लेना चाहिए था। मेरे हिसाब से ये फिल्म हिन्दुस्तान के सामाजिक परिवेश और हिन्दुस्तानी औरत की ज़रुरत को बिना समझे-बुझे बनाई गई है और इसका कोई विशेष असर भी होने वाला नहीं है क्योंकि जिस आधी आबादी के लिए ये बनी है, उस आधी आबादी की आधी आबादी को, बात समझ में ही नहीं आएगी और बाकी की आधी आबादी की बची-खुची समझ पर भी पत्थर पड़ जायेंगे। इसलिए बेटियों-बहनों से गुज़ारिश है कि इस विडिओ को सीरियसली लेने की ज़रुरत नहीं है क्योंकि This is definitely NOT a solution for women empowerment in India.

6 comments:

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    1. ओंकार जी,
      आपका हृदय से धन्यवाद।

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 9-4-15 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1943 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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    1. दिलबाग जी,
      आभारी हूँ।

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