Tuesday, March 10, 2015

lone lonely loner....




न दीपक नहीं चाँदनी पर भरोसा
मैं करके चली थी किसी पर भरोसा

चलो पत्थरों को भी अब आज़माएँ
बहुत कर लिया आदमी पर भरोसा

वो करता रहा इसलिए ज़ुल्म मुझ पर
उसे था मेरी ख़ामुशी पर भरोसा


भरोसे के क़ाबिल तो बस मौत ही है
न कर बेवफ़ा ज़िन्दगी पर भरोसा


मैं ख़ुद पर भरोसा नहीं रख सकी जब
तो करने लगी हर किसी पर भरोसा


अँधेरा हुआ तब उसे नींद आई
जिसे था बहुत रौशनी पर भरोसा


दिखावे से लबरेज़ थी तेरी महफ़िल
मैं करके लुटी सादगी पर भरोसा





16 comments:

  1. चलो पत्थरों को भी अब आज़माएँ
    बहुत कर लिया आदमी पर भरोसा
    ...वाह...बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल...

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    1. आपका धन्यवाद राजीव जी।

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  3. बहुत सुन्‍दर। क्‍या आप कुशल हैं? इधर आशंका है। कृपया अपनी कुशलक्षेम से अवगत कराएं।

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    1. विकेश,
      मैं बिल्कुल अच्छी हूँ, तुमने मेरी सुध ली, बहुत ख़ुशी हुई।
      आशा है तुम भी अच्छे होगे।
      हैपी बिलेटेड होली।

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  4. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 12-03-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1915 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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  5. विर्क जी,
    आपका धन्यवाद !

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  6. बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल...
    अँधेरा हुआ तब उसे नींद आई

    जिसे था बहुत रौशनी पर भरोसा
    दिखावे से लबरेज़ थी तेरी महफ़िल
    मैं करके लुटी सादगी पर भरोसा

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    1. सक्सेना साहेब,
      आपने पसन्द किया, आपका शुक्रिया।

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    1. रेवा जी,
      सबसे पहले तो आपका स्वागत है और आपकी हौसलाअफ़्ज़ाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया।

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  8. वाह, बहुत सुन्दर ग़ज़ल

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    1. आपका धन्यवाद ओंकार जी।

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  9. आयुर्वेदा, होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा, योगा, लेडीज ब्यूटी तथा मानव शरीर
    http://www.jkhealthworld.com/hindi/
    आपकी रचना बहुत अच्छी है। Health World यहां पर स्वास्थ्य से संबंधित कई प्रकार की जानकारियां दी गई है। जिसमें आपको सभी प्रकार के पेड़-पौधों, जड़ी-बूटियों तथा वनस्पतियों आदि के बारे में विस्तृत जानकारी पढ़ने को मिलेगा। जनकल्याण की भावना से इसे Share करें या आप इसको अपने Blog or Website पर Link करें।

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