Monday, December 21, 2009

उसी गली में एक अदद दिल पागल छोड़ आये हैं


मत पूछ तेरी महफ़िल में हम क्या क्या छोड़ आये हैं
कुछ लम्हें तो आज के थे कुछ बीता कल छोड़ आये हैं

तेरी चौखट पर आँखों ने सजदे में झुकना सीख लिया
आज वहीँ चंद सांसें और इक आँचल छोड़ आये हैं

बरसी तो थी घटा बहुत पर भीग नहीं पाया था मन
इस खातिर उस बादल में हम काजल छोड़ आये हैं

रक्स किये हैं धड़कन ने जब भी तुमसे नयन मिले
तीरे नज़र से घायल सा दिल घायल छोड़ आये हैं

जाग गयी है यादों की गलयारी जो अलसाई थी
उसी गली में एक अदद दिल पागल छोड़ आये हैं

25 comments:

  1. साथिया आज की रात हमें नींद नहीं आएगी,
    सुना है, उनकी महफ़िल में रतजगा है...

    जय हिंद...

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  2. दीदी चरण स्पर्श

    क्या बात है , बस छा गयी आप , जितना अच्छा गाना उतना ही अच्छा लिखना , लाजवाब ।

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  3. आपके शब्द संयोजन अद्भुत भाव सृजित करते हैं -गहि न जाई अस अद्भुत बानी !

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  4. कुछ बीते लम्हे कल के कुछ आज के छोड़ आये .... वाह ...बस इन लम्हों को छोड़ने के फेर में हमें मत भूल जाईयेगा ...
    आज तो पूरी ग़ज़ल ही गज़ब असर दिखा रही है ...किस शेर को शामिल करूँ ...किसे छोड़ दू ...
    बादल में काजल , नजर से घायल ये पागल दिल .....बहुत खूब ....!!

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  5. "एक अदद दिल पागल छोड़ आये हैं"

    बहुत अच्छे!

    ये दिल, ये पागल दिल मेरा ...

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  6. पहले शेर की दूसरी लाईन को सौ नंबर.

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  7. मत पूछ तेरी महफ़िल में हम क्या क्या छोड़ आये हैं
    कुछ लम्हें तो आज के थे कुछ बीता कल छोड़ आये हैं

    तेरी चौखट पर आँखों ने सजदे में झुकना सीखा
    आज वहीँ चंद सांसें और इक आँचल छोड़ आये हैं
    बहुत सुन्दर !

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  8. तुम्हारे खेलने के वास्ते ऐ दो-जहाँ वालों
    उसी गली में एक अदद दिल पागल छोड़ आये हैं

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  9. बहुत सुंदर कहा आपने।

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  10. बहुत सुन्दर ग़ज़ल। गाने में भी बहुत मधुर लगेगी।

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  11. जाग गयी है यादों की गलयारी जो अलसाई थी
    उसी गली में एक अदद दिल पागल छोड़ आये हैं

    Kaise harbaar itna sundar kah jatee hain aap..? Mantrmugdh kar detee hain...

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  12. एक और शानदार ग़ज़ल...मुबारक हो...दिन प्रति दिन अहसास और निखरते जा रहें हैं.

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  13. वाह लाजवाब रचना.

    रामराम.

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  14. बरसी तो थी घटा बहुत पर भीग नहीं पाया था मन
    इस खातिर उस बादल में हम काजल छोड़ आये हैं

    khoobsurat ghazal....badhai

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  15. बहुत बढ़िया !!

    जाग गयी है यादों की गलयारी जो अलसाई थी
    उसी गली में एक अदद दिल पागल छोड़ आये हैं

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  16. बहुत ही सुंदर रचना है। ब्लाग जगत में द्वीपांतर परिवार आपका स्वागत करता है।


    pls visit........

    www.dweepanter.blogspot.com

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  17. आप की यह रचना बहुत सुंदर लगी.
    धन्यवाद

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  18. रक्स किये हैं धड़कन ने जब भी तुमसे नयन मिले
    तीरे नज़र से घायल सा दिल घायल छोड़ आये हैं
    जाग गयी है यादों की गलयारी जो अलसाई थी
    उसी गली में एक अदद दिल पागल छोड़ आये हैं
    Behatareen panktiyan---khoobasurat shabdon men---
    HemantKumar

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  19. ब्लॉग पर आने का बहुत-बहुत धन्यवाद...

    बरसी तो थी घटा बहुत पर भीग नहीं पाया था मन
    इस खातिर उस बादल में हम काजल छोड़ आये हैं
    ......सुंदर रचना

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  20. ada ji mujhe aise lag raha hai jaise me koi gazel sun rahi hu...aapne itni acchhi gazel likhi hai ki tareef k liye shabdo ka tota hai. ek ek ashaar jadu chala raha hai . bahut bahut khoob.

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  21. इस खातिर उस बादल में हम काजल छोड़ आये हैं
    uff kya baat kahi hai..bahut khoob ada ji

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  22. शव्‍द-शव्‍द सुन्‍दर. भाव-बिम्‍ब परिपूर्ण.
    धन्‍यवाद.

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