Thursday, December 6, 2012

अपने गिरेंबाँ में भी, झाँको तो एक बार ....

अपने गिरेंबाँ में भी, झाँको तो एक बार ....
आज 6 दिसंबर है और वो मार्च महीने की 2 तारीख़ थी ...

11 comments:

  1. किसी भी धरोहर को नष्ट करना गलत है और यह प्राकृतिक नियमों का उल्लन्घन् है

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  2. शर्मनाक है यह व्यवहार, पर यह पहली बार नहीं हुआ है।

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  3. धर्म बस पंगे ही डालता है

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  4. इनको सब अलाऊड है जी, ऐसा करके भी तो सबाब मिलता है।

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  5. अल्लाहो-अकबर कहें ख़ूं से रंग कर हाथ !
    नहीं दरिंदों से जुदा उन-उनकी औक़ात !!

    निंदनीय !
    कायरों का ही काम विध्वंस और ख़ून-ख़राबा होता है …

    इस कायराना हरक़त के इतने वर्ष बीत जाने के बावजूद अगर बुद्ध और उनके संदेश को नहीं मिटाया जा सका तो इन हमलावरों की पीढ़ियों और समर्थकों को समूची मानव जाति से माफ़ी मांगनी चाहिए …

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  6. जिस दिन ये अपने गिरेबान में झाँक के देख लेंगे, सच कहता हूँ दुनिया की आधी आबादी चैन की नींद सोने लगेगी (बाकी आधी पर किसी चीज़ का असर नही होता है...) खैर... अभी तो झेलना ही है...चाहें हस के चाहें ...

    सादर

    ललित

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  7. जिस दिन ये अपने गिरेबान में झाँक के देख लेंगे, सच कहता हूँ दुनिया की आधी आबादी चैन की नींद सोने लगेगी (बाकी आधी पर किसी चीज़ का असर नही होता है...) खैर... अभी तो झेलना ही है...चाहें हस के चाहें ...

    सादर

    ललित

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