Sunday, May 1, 2011

खाँचे.....


मैं..
जन्म लेकर भी यहाँ, 
कहाँ !
कभी, आज़ाद हो पाती  हूँ,
'चाल-चलन',
'सुन्दर-सुशील-घंरेलू',
जैसे, खाँचे,
संग अपने ले आती हूँ,
उनमें फिट होने की कोशिश में,
मैं, जीवन बिताती हूँ,
जीवन मेरा कम पड़ जाता है,
और 
खाँचे, धरे रह जाते हैं....
  

17 comments:

  1. bhtrin andaaz.akhtar khan akela kota rajsthan

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  2. इन ढाँचों से कहीं बड़ा है जीवन।

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  3. 'चाल-चलन',
    'सुन्दर-सुशील-घंरेलू',
    जैसे, खाँचे,
    संग अपने ले आती हूँ,
    उनमें फिट होने की कोशिश में,
    मैं, जीवन बिताती हूँ,

    हर नारी की यही दास्तान ...अच्छी प्रस्तुति

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  4. कुछ लीक पर, जीवन में कुछ नये रास्‍ते.

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  5. tasweer aapne ekdam kavitaa ke khaanche ki chun kar lagaayi hai...




    kabhi kavitaa padhte hain...
    kabhi tasweer dekhte hain....


    :)

    dono hi ek doosre ki poorak lag rahi hain...

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  6. खांचों में हर कोई जकड़ा हुआ है- अच्छा या बुरा :)

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  7. कोई आजाद नहीं है यहाँ पर, घोषित अघोषित खाँचों-साँचों में कसा है जीवन, और ताउम्र इसी जद्दोजहद में जीते हैं सब।
    हमेशा की तरह खूबसूरत रचना।

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  8. सबको इश्वर ने निश्चित खांचों में ही भेजा है..कर्त्तव्य कर्म की राह इन पूर्वनिर्धारित खांचो से मुक्ति द्वार तक ले जाती है..
    सुन्दर कविता

    आशुतोष की कलम से....: धर्मनिरपेक्षता, और सेकुलर श्वान : आयतित विचारधारा का भारतीय परिवेश में एक विश्लेषण:

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  9. इन खांचों में फिट होने की कोशिश करने के बजाय अपना स्वयं का खांचा बनने का प्रयास होना चाहिए..बहुत सुन्दर और भावमयी प्रस्तुति..

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  10. aur gaharaaiyaan ab bakhsh N hasrat mujh ko,
    kitne saagar to samete hai, ye saaghar meraa...

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  11. बहुत सुन्दर और भावमयी प्रस्तुति|धन्यवाद|

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  12. सही कहा ...खांचों और सांचों में जीते हैं हम ...इन बने बनाये खांचों से जरा बाहर झाँका तो विभिन्न उपाधियाँ और सर्टिफिकेट इन्तजार कर रहे होते हैं !

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  13. जैसे भी हो फिट तो होना ही पड़ता है खांचे में.

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  14. बहुत खूब !

    वैसे खांचे किधर नहीं हैं इधर भी आवारा / लफूट या फिर फर्माबरदार / संस्कारी वगैरह वगैरह !

    अमूमन खाल और खोल से बाहर की दुनिया के निषेध का चलन हुआ करता है समाज में ! उसकी अपनी भी मजबूरियाँ हो सकती हैं इसके लिए !

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  15. अगर खांचे न हो भी तो बिखराव् है हाँ अगर अपने आप तय किये जाय तो व्यवस्थित हो जाय |
    बहुत बढिया भाव |

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