माँ -
ने समझाया,
बचपन छूट चुका है
ये भी बताया
बड़ी हो गयी हो,
हाथ पांव समेट कर
ढंग से रहा करो,
इस बात को बार बार
भेजे में घुसाया
उसने आँखें गोल गोल घुमाई
अंगूठा दिखया, जीभ निकाली
और पैर पटक कर बैठ गयी
सास-
ने फटकारा
कुलच्छिनी बताया
भाग फूट जाने का
अंदेशा लगाया
छाती पर मूँग दलने
की भीषण पीड़ा से भी
बार बार उसको
अवगत कराया
उसने आँखे झुका ली
मन ही मन गोल गोल घुमाई
मन ही मन अंगूठा दिखाया
मन ही मन जीभ निकाली
पैर पटक कर,
मन ही मन बैठ गयी
बेटी से बहू तक की
सारी सीढियाँ
मैं तो तय कर गयी
पर वो लड़की ?
वो तो बस
आँख, अंगूठा, जीभ
और पाँव में ही सिमट
कर रह गयी
