Saturday, September 14, 2019

परिचय की गाँठ

अब प्रेम पराग,
अनुराग राग का
उन्माद ठहर चुका है...
बचे हैं कुछ दुस्साहसी
लम्हों की आहट,
मुकर जाने को तत्पर
वैरागी होता मन,
और आस पास
कनखजूरे सी रेंगती
ख़ामोशी....
इतनी भी पुख़्ता नहीं होती
परिचय की गाँठ !!!

19 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (16-09-2019) को    "हिन्दी को वनवास"    (चर्चा अंक- 3460)   पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. kya baat hai........jai ho.....muddat baad amad hue hai........'un-myask' bhav se likihi hue 'su-aspast' kavita....sundar.........pranam.

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  3. इन दुस्साहसी लम्हों में जो परिचय रह जाता है वाही तो जीवन हो जाता है ...

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    1. क्या बात कह दी आपने..शुक्रिया

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  4. बहुत बढ़िया

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  5. बहुत अच्छा लेख है Movie4me you share a useful information.

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  6. मन में गहराई तक उतरती भावप्रवण पंक्तियाँ !

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