
कितनी ही बार मैंने ख़्वाब जलाये हैं
हाल-ए-दिल पूछने वो लौट आये हैं
उन फिजाओं की रौनक अब क्या कहिये
जहाँ प्यार के नगमें हमने गुनगुनाये हैं
सदियों की थी दूरियाँ हम नाप आये हैं
नजदीकियों के भी वहाँ पर चंद साए हैं
ज़ख़्म की उम्मीद थी गुलों से उलझ गए
इन फूलों ने फिर मेरे हौसले बढ़ाये हैं
दिल टूटा था और नुमाइश लग गयी
आँखों ने फ़िर वही कहकहे लगाये हैं
नज़रें झुकीं 'अदा' की हया से भरीं हुईं
दिल आज फिर भूला कि वो पराये हैं