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Wednesday, February 17, 2010

ब्लॉगर चिंतन इति..............



ब्लॉगर हौं तो बस एही बतावन बसौं कोई गुट के छाँव मझारन 

नाहीं तो पसु बनिके फिरोगे आउर खाओगे नित रोज लताड़न  

पाहन बनौ कि गिरि बनौ नहीं धरोगे धैर्य कठिन है ई धारण

फिन खग बनि इक पोस्ट लिखोगे औ करोगे अभासीजगत से सिधारन 



क्यूँ करुँ मैं गिला अब तुमसे भला
जब तुम सुन रहे हो तो करार आये

वो जो गुज़री थी कल रात शाने में तेरी
अब गोशे-दर-गोशे में बहार आये

बच जायेंगे अंजाम-ए-इश्क से ये परवाने   
ग़र शम्मा को उन पर भी प्यार आये

जुनूँ की हदों तक है मुझे तुमने चाहा
बस निभा दो न जानम तो एतबार आये

मोहब्बत का ऐसा असर हमने देखा
मुस्कुराते हैं काँटे जब निखार आये