Sunday, May 5, 2013

तिनका ही था कमज़ोर सा, उसका मुक़द्दर, देखना....


किस्मत की वीरानियों का, मेरा वो मंजर, देखना 
हैराँ हूँ घर की दीवार के, उतरे हैं सब रंग, देखना 

उड़ता रहा आँधियों में वो, जाने कितना दर-ब-दर 
तिनका ही था कमज़ोर सा, उसका मुक़द्दर, देखना

पोशीदा है ज़मीन के, हर ज़र्रे पर दिलकश बहार 
उतरो ज़रा आसमान से, आएगी नज़र वो, देखना

सोया किया क़रीब ही, फ़रिश्ता दश्त-ए-दिल का 
ख़ुशबू सी उसकी बस गई, महका है शजर, देखना

इश्क़ के दावे उनके, अब तो हो गए आसमाँ-फरसा 
हम भी देखेंगे उनकी अदा, और तुम भी 'अदा', देखना 


आगे भी जाने न तू ....आवाज़ 'अदा' की ...

30 comments:

  1. Yashoda ne kaha :

    दीदी
    अभी http://swapnamanjusha.blogspot.in/2013/05/blog-post_5.html हूँ मैं
    काव्य मंजूषा से कमेंट बाक्स आज गायब है
    गीत....आगे भी आपकी प्यारी आवाज सुनाई देती रहेगी
    और दबंगई से
    आपकी ये रचना मैं मेरी धरोहर में रख रही हूँ
    http://4yashoda.blogspot.in/2013/05/blog-post_5600.html
    सादर
    यशोदा

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    1. Pata nahi kaise Yashoda comment Box gayab ho gaya tha. Khair ab aa gaya hai :)

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    2. 'मेरी धरोहर' में मेरी इस रचना को शामिल करने के लिए बहुत धन्यवाद यशोदा !

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  2. बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल की प्रस्तुति,आभार.

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    1. राजेंद्र जी, धन्यवाद !

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  3. बहुत बढ़िया....खूबसूरत रचना ..

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  4. एक खूबसूरत अदाभरी रचना!

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    1. आपका बहुत धन्यवाद डॉक्टर साहेब !

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  5. आवाज़ माशा अल्लाह और ग़ज़ल खुबसूरत भावों संग बधाई

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  6. बहुत ही सुन्‍दर

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  7. उड़ता रहा आँधियों में वो, जाने कितना दर-ब-दर
    तिनका ही था कमज़ोर सा, उसका मुक़द्दर, देखना
    बहुत खूब.

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    1. वंदना,
      तुम्हारा आना अच्छा लगा।
      तुम्हें रचना पसंद आई ये और भी अच्छा लगा।

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  8. बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति!
    साझा करने के लिए आभार...!
    --
    सुखद सलोने सपनों में खोइए..!
    ज़िन्दगी का भार प्यार से ढोइए...!!
    शुभ रात्रि ....!

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    1. धन्यवाद शास्त्री जी !

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  9. ये गज़ल पहली बार भी बहुत अच्छी लगी थी, इस बार भी। दूसरी पंक्ति में दो कॉमा वाला प्रयोग बहुत अच्छे से निभाया गया है। इसके अतिरिक्त देखना के एक से ज्यादा मतलब निकलते हैं - देखना, देख ना(मत देख) देख ना(इसरार वाला)। जिसको जो समझ आये वही समझ ले, हाँ नहीं तो!! :)
    लब्बो लुआब ये कि, गज़ल बहुत अच्छी है, चित्र भी। और गाने की तो क्या कहें, सिस्टम ही ठीक नहीं है अभी, वो तो बहुत अच्छा होता ही है आपकी आवाज में।

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    1. वोई तो !
      देख ना, देख ना :)

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  10. आज की ब्लॉग बुलेटिन देश सुलग रहा है... ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  11. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (06-05-2013) के एक ही गुज़ारिश :चर्चा मंच 1236 पर अपनी प्रतिक्रिया के लिए पधारें ,आपका स्वागत है
    सूचनार्थ

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  12. बहुत सुंदर

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  13. बढ़िया ग़ज़ल...गाना तो हमेशा की तरह बहुत ही खूबसूरती से गाया है

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  14. बहुत ही सुन्दर रचना! मेरी बधाई स्वीकारें।
    कृपया यहां पधार कर मुझे अनुग्रहीत करें-
    http://voice-brijesh.blogspot.com

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  15. बढ़ि‍या गज़ल...वाह

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  16. भावभीनी ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए बधाई । सस्नेह

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