Wednesday, May 1, 2013

मैं ज़िन्दगी जलाकर बार-बार, छोड़ जाऊँगी.....




इक ज़ुनून, 
कुछ यादें,
थोड़ा प्यार,
छोड़ जाऊँगी।
इन हवाओं में मैं 
इंतज़ार,
छोड़ जाऊँगी।
ले जाऊँगी साथ,
कुछ महकते से रिश्ते,
मेरे नग़मों की बहार 
छोड़ जाऊँगी।
कहीं तो होंगे,
मेरे भी कुछ ग़मगुसार,
जलाकर इक दीया
प्रेम का यहीं कहीं, 
ये मज़ार,
छोड़ जाऊँगी।
कहाँ-कहाँ बुझाओगे,
मेरी सदाओं की मशाल,
मैं ज़िन्दगी जलाकर,
बार-बार,
छोड़ जाऊँगी।
मैं लफ्ज़-लफ्ज़ यक़ीं हूँ,
तुम भी यक़ीन कर लो,
मैं हर्फ़-हर्फ़ 
एतबार,
छोड़ जाऊँगी....!

एक गीत..नैनों में बदरा छाये...और आवाज़ वही...'अदा' की... 

16 comments:

  1. कहाँ-कहाँ बुझाओगे,
    मेरी सदाओं की मशाल,
    मैं ज़िन्दगी जलाकर,
    बार-बार,--
    आपकी सदायों की मसाल जलती रहे \
    डैश बोर्ड पर पाता हूँ आपकी रचना, अनुशरण कर ब्लॉग को
    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    latest postजीवन संध्या
    latest post परम्परा

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  2. शानदार | बहुत खूब लिखा | बधाई

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  3. ऊर्जा का प्रवाह अनवरत बहे..

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  4. आनंददायक सचमुच

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  5. यश काया ऐसे ही अमर बन जाती हैं !

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  6. सुंदर रचना मन को छूती हुई
    बधाई
    गजब का अहसास
    उत्कृष्ट प्रस्तुति


    विचार कीं अपेक्षा
    आग्रह है मेरे ब्लॉग का अनुसरण करें
    jyoti-khare.blogspot.in
    कहाँ खड़ा है आज का मजदूर------?

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  7. आपकी यह प्रस्तुति कल के चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें

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  8. कहाँ-कहाँ बुझाओगे,
    मेरी सदाओं की मशाल,
    मैं ज़िन्दगी जलाकर,
    बार-बार,
    छोड़ जाऊँगी।...

    सिम्पली सुपर्ब और गाना तो हमेशा की तरह महा सुपर्ब

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  9. रचना का हर शब्द हृदयातल को छू रहा है।
    कहाँ कहाँ बुझाओगे मेरी सदाओं की मशाल...
    बहुत ही टचिंग अभिव्यक्ति आदरेया।
    सादर बधाई।

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  10. ऐसे शब्द हम पढने वालों को भी ऊर्जा देते हैं , हौसला बढ़ाते हैं
    गीत तो कमाल है

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  11. हर्फ - हर्फ एतबार और सांस - सांस ज़िन्दगी भी तो .......

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  12. बहुत बढ़िया।

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  13. सुन्दर एहसास के साथ खुबसूरत गायन बधाई शुभ संध्या

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  14. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए शनिवार 04/05/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  15. नैनों मे कजरा छाए
    बिजली सी चमके हाए
    बेहतरीन नगमा...
    और रचना भी उत्कृष्ट...
    दीदी..
    आप मीठा पान खाया करो
    और भी मीठी रचना पढ़ने को मिलेगी :)
    सादर

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  16. वाह, बहुत खूब

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