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Thursday, July 30, 2009

फिरंगी रामायण...

(यह व्यंग मैंने लिखा है, पाश्चत्य सन्दर्भ में, अगर यह घटना आज पश्चिम में हो तो कैसी होगी , पात्रों के नाम हैं
सैम, रीटा, लकी, उर्सुला और रेवन, कहानी शुरू होती है कि सैम और रीटा को वनवास प्रस्थान की आज्ञा मिल गयी है )

हलकी चिकोटी काटी उसने
ले गई किनारे धकिया कर
फिर 'सैम' से बोली 'रीटा'
अपनी बात इठलाकर

कितनी क्यूट स्टेप-मॉम है
डैड भी कितने प्यारे हैं
फोर्टीन वीक्स का वेकेशन दिया है
किस्मत के चमके सितारे हैं

ऐसी शुभ घड़ी में हनी !
तुम कोई पंगा मत डालो
पिकनिक का डब्बा पैक करो
और ट्रेलर की चाभी उड़ा लो

अब अडल्ट हो गए हैं हम, हनी
इन-लास् का हर वक़्त झगड़ा है
मेरा मूड, यहाँ नहीं रहने का
पिअर-प्रेशर भी तगड़ा है

इतनी सी तो शर्त हैं उनकी
गहने-कपड़े छोड़ जाओ
वैसे भी वेकेशंस का रुल है
कच्छा-बनियान ही पाओ

दंडक-लैंड के कॉटेज की
चाभी अगर मिल जाती
तो वेकेशन की खुशियाँ भी
चार-गुनी बढ़ जातीं

एक बात और कहती हूँ
'लकी' को लेकर मत आना
साफ़ साफ़ मना कर देना
या फिर कर देना कोई बहाना

प्राइवेसी में हमारी
बड़ा खलल पड़ जाता है
जब देखो तो वह काटेज के
आगे-पीछे मंडराता है

'उर्सुला' बेचारी यहाँ पर
निपट अकेली रह जावेगी
जब लौट कर हम आवेंगे
कितनी बातें सुनावेगी ?

इस बार सिर्फ हम दोनों ही
वेकेशन मनाने जावेंगे
हो सके तो 'रेवन' को भी
वहाँ पर बुलवावेंगे

कित्ता ब्लैक और टाल है
कित्ता हेंडसम लगता है
काली शर्ट और जींस में
डेन्जल वाशिंगटन लगता है

पिछले सारे डीफ्रेन्सेस भूला कर
उससे हाथ मिलाना है
इस बार वेकेशन में मेरे सैम
पिछला लोचा सुलझाना है