Sunday, April 24, 2011

भावना...


जीवन की, 
स्थूल आवश्यकताएँ
बहुत कुछ हो सकतीं हैं,
परन्तु सबकुछ नहीं,
कुछ और भी होता है
इनके अतिरिक्त,
आगे बढ़ो,
और वरण कर लो 
उस एक भावना का
जो छलना नहीं,
वितृष्णा नहीं,
आत्म-प्रवंचना नहीं,
वह तो बस पवित्र है ,
कोमल है,
अनश्वर है,
अद्भुत है,
वह मात्र प्रेम है,
और कुछ नहीं..!
  

22 comments:

  1. वह मात्र प्रेम है,
    और कुछ नहीं..!
    प्रेम है, सब कुछ है.

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  2. यही सत्य भी है ....बस एक भावना...

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  3. जीवन की,
    स्थूल आवश्यकताएँ
    बहुत कुछ हो सकतीं हैं,
    परन्तु सबकुछ नहीं,

    बहुत सटीक ....आपका आभार

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  4. वरण कर लो
    वह भावना जो छल नहीं है ...
    सिर्फ प्रेम है ...

    सुन्दर सन्देश !

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  5. भावना अनश्वर है...

    लेकिन आप भी अर्द्धब्लॉगेश्वर बनने की राह पर अग्रसर हैं...

    इसे समझने के लिए आपको आज मेरी पोस्ट तक पहुंचने का कष्ट करना पड़ेगा...

    जय हिंद....

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  6. जीवन की,
    स्थूल आवश्यकताएँ
    बहुत कुछ हो सकतीं हैं,
    परन्तु सबकुछ नहीं... sach kaha

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  7. प्रेम एक ही सत्य है,
    जगत उसी में व्यक्त है।

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  8. भावना होती ही इतनी पवित्र है बहुत अच्छा लिखा आपने ......
    अक्षय-मन

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  9. जी हाँ... वह तो मात्र प्रेम है .....

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  10. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (25-4-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  11. प्रेम --आजकल एक रेयर कोमोडिटी बन गया है ।

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  12. भावना..सचमुच स्थूल से कहीं बढ़कर है ...भावना है तो पत्थर भी पूज्य है...भावना नहीं तो जीवित भी मृत तुल्य है।

    बड़े दिनों के बाद ब्लॉग पर आपकी रचना देखने को मिली...अच्छा लगता है आपको पढ़ना ...

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  13. ज़िंदगी सिर्फ़ मुहब्बत नहीं कुछ और भी है
    सुर्खो-रुख्सार की जन्नत नहीं कुछ और भी है....:)

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  14. आगे बढ़ना पड़ता है? फ़िर तो हमसे जरूर हो गया वरण इस भावना का, हम ठहरे सदा के बैक बैंचर्स। खैर, देखी जायेगी..

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  15. बिलकुल सच और अच्छा कहा आपने ..

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  16. वह तो बस पवित्र है ,
    कोमल है,
    अनश्वर है,
    अद्भुत है,
    वह मात्र प्रेम है,
    और कुछ नहीं..!

    ...बहुत खूब! बहुत सुन्दर भावमयी प्रस्तुति...

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  17. वह तो बस पवित्र है ,
    कोमल है,
    अनश्वर है,
    अद्भुत है,
    वह मात्र प्रेम है,
    और कुछ नहीं..!

    बहुत ही खूबसूरत.....

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  18. हमेशा की तरह बहुत खूब ...........
    आपको हमेशा से पड़ती रही हूँ पर टिप्पड़ी करने की हिम्मत पहली बार कर पाई हूँ
    क्षमा कीजियेगा कोई गलती कर रही हूँ तो

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