Sunday, February 13, 2011

मेरे ब्लाग का तो बस ख़स्ता हाल हुआ है :):)



कुछ लिखना आज कल मुहाल हुआ है 
इस दिमाग की धोती का रुमाल हुआ है
कुछ गीत मेरे आप सुनते जाइए हुज़ूर 
मेरे ब्लाग का तो बस ख़स्ता हाल हुआ है :):)

फिल्म : चिराग़
आवाज़: लता
संगीत : मदनमोहन
गीत : मजरूह सुल्तानपुरी
इत्थे 'अदा' दी आवाज़ है जी...:)

तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
ये उठे सुबह चले, ये झुकी शाम ढले
मेरा जीना मेरा मरना इन्हीं पलकों के तले
तेरी आँखों के सिवा ...

ये हों जहाँ इनका साया मेरे दिल से जाता नहीं
इनके सिवा अब तो कुछ भी नज़र मुझको आता नहीं
ये उठे सुबह चले ...

ठोकर जहाँ मैंने खाई इन्होंने पुकारा मुझे
ये हमसफ़र हैं तो काफ़ी है इनका सहारा मुझे
ये उठे सुबह चले ...


29 comments:

  1. बढ़िया तो लिखा है!

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  2. गाना भी मेरी पसंद का और आवाज़ भी मेरी पसंद की. कानों को बहुत अच्छा लगा,अदा जी. आभार.

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  3. ओरिजिनल गाना अपनी जगह, इत्थे जो आवाज है वो भी शानदार है।

    आप गाती रहें, सुनने वाले तो सुन ही रहे हैं।

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  4. सुन्दर गीत सुनाया...


    फोन उठ नहीं रहा..मेरे सेल पर लगाईये.

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  5. @ मेरे ब्लाग का तो बस ख़स्ता हाल हुआ है

    कुछ लेते क्यों नहीं?
    खस्ता शेर ट्राई किया?

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  6. BTW, गाना बहुत अच्छा लगा

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  7. इस दिमाग की धोती का रुमाल हुआ है ...जो काम रुमाल करता है , धोती कहाँ कर सकती है ...आंसूं पोंछने का ..!

    सुन्दर गीत ...!

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  8. अपना भी हाल आपके जैसा है,
    क्या करे हम भी, मौसम ही कुछ ऐसा है...

    जय हिंद...

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  9. बेहतरीन प्रस्तुति...

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  10. aapke blog ka khasta haal...:)
    ye kaise aur kab hua..

    happy valentine's day to all..:)

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  11. अब जाने भी दीजिये ।
    वापस आ जाइये अपनी उसी दुनिया में ।

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  12. @ आदरणीय शास्त्री जी,
    प्रणाम,
    मैं कुछ भी लिखूंगी आपको तो अच्छा लगेगा ही...रिश्ता जो ऐसा है..
    आभारी हूँ..!

    @ कैलाश जी,
    आभारी हूँ..!

    @ योगेन्द्र जी,
    आपका हृदय से धन्यवाद..

    @ कुँवर जी,
    ये तो आपका बड़प्पन है...वर्ना हम तो बस ऐंवें हीं हैं...:)

    @ संजय जी,
    मैनू लगदा है त्वाडे कान बिच कोई पिरोब्लेम हैगी...:)
    डाक्टर नु दिखाओ जी...
    त्वानू लख लख धनबाद ...
    असी आभारी हन..:):)

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  13. @ समीर जी,
    आप भी न...!
    फ़ोन भी कभी अपने आप उठता है का...अब जब हम नहीं उठावेंगे तो कैसे उठेगा भला...
    हम तो इसलिए नहीं उठाये कि कहीं कोई मनचला 'वेलेंटाइन डे' की ख़ुशी में न कर रहा हो फुनवा...
    अब रोज रोज फुनवा बदलेंगे तो येही न होगा....हाँ नहीं तो...!!
    गितवा पसंद किये..बहुते धनबाद..

    @ क्षमा जी,
    जो ख़ुद सुन्दर होते हैं उन्हें हर चीज़ सुन्दर लगती है...और आप भी अपवाद नहीं हैं..
    दिल से शुक्रिया आपको..

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  14. @ अनुराग जी,
    अब का कहें आपसे...कमी जो है हमरा में ...
    जे बा की ना ...इंडियन तो हैं बाकी इस्मार्ट नहीं हैं ना...:)
    जबरिया आप गीत पसंद कर लिए हैं...खोइंछा भर धनबाद देते हैं ...ले लीजियेगा..:)

    @ वाणी जी,
    ई का कह रही हैं आप...!
    जो काम रुमाल कर सकता है, धोती नहीं कर सकती...!
    अरे धोती का काम नहीं कर सकती...आप आँसू पोछने का बात करती है...इससे से तो हम नाक पोछते भी देखे हैं लोगन को..
    हाँ नहीं तो..!

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  15. @ प्रवीण जी,
    'मन' तो कह दिया, या , 'मैंने' तो कह दिया
    झूठ मत बोलिए ...:):)

    @ ओ खुशदीप जी,
    आपका हाल मेरे हाल जैसा कैसे हो सकता है भला....मौसम में बहुत फर्क है....यहाँ ३६ इंच बर्फ पड़ी हुई है...
    जय कनाडा...:):)

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  16. @ सुशील जी
    आपका बहुत धन्यवाद..

    @ मुकेश जी,
    इसमें कौनो आश्चर्य नहीं...बड़े-बड़े लोग औंधे पड़े मिलते हैं...फिर हमरी का बिसात..!
    आपको भी ई जो दिन है उसकी शुभकामना...
    हम आभारी हूँ..

    @ डाक्दर साहेब,
    हम कौनो खिसियाये हुए नहीं हैं ...ऊ जो लोग नहीं हो जाता है,कभी-कभी 'बीजी'...वोही हो गए हैं हम भी...का करें..:):)
    आप आए...बहुत अच्छा लगा...
    मन से धन्यवाद कहते हैं..

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  17. चिंता मत कीजिए.... अपना भी वही हाल हुआ है :)

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  18. नायिका के हाथ में लट्ठ देखकर अपनी खुद की आँखों में भय समां गया है जी :)

    सच्ची सच्ची बताइयेगा कि इस फोटो को लगाने के पीछे आपका मकसद क्या है :)

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  19. सुन्दर गीत सुनाया...

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  20. @ प्रसाद जी,
    हम तो बेकारे में चिंता से दुबराय रहे थे...:)
    अब ठीक हो गए हैं...
    बहुत धन्यवाद..

    @ अली जी,
    ई पूरा लोट में आप ही समझदार निकले...बताइये एतना बड़ा लाठी और कोई देख ही नहीं पाया...
    हमरी पोस्ट में महा पोसिटिव बात यही तो थी...
    चिंता मत कीजिये...बी पोसिटिव...:)

    @ संजय,
    बहुत ख़ुशी हुई तुम आए..और तो आउर गाना पसंद भी किये...
    ख़ुश रहो...
    दीदी..

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  21. KE MUN ACHO.....KI HOYE CHHE.....'EE KHASTA-HAAL
    HOYE 'KHOINCHA BHARE DHANBAD DETE PARO'.....OORI
    BABWA.....LAGCHE ALI SA BHAI KHEYE GAYE CHHE...

    'KAVI-KAMAL' "SAMEER-LAL" BADE AAP-NAR 'SHAIREE'
    JET-VIMAN MUTUN URIYE DIYE CHHE.....DEKHUN TO...
    'DHOTI KE TUK KARE RUMAL BANA DIYE CHHEN'.....EE
    TA KINTU BHALO NAI......

    KICHU ALPO-VISHESH HOTE PARE-KSHMA CHAHBO....

    PRANAM.

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  22. सुन्दर प्रस्तुति।

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  23. @ उड़ी बाबा आर एक टा शोंजोय...
    कोथाय ठीके एतो शोंजोय रा आशछेन जे बाबा :):)
    की जे बोलबो की होए गेयेछे....शोब गोंडो गोल होए गेयेछे...सोमोय किछु कोम तो अमार काछे ...ताई जोन्ने ...आर किछु बिशेष लोय..
    आमार ख़ूब भाग जे आपनी आमार ब्लॉग ते एशेछेन....
    आपनार धोंनोबाद कोरछी...

    @ कोकस साहेब,
    आभारी हूँ आपकी...आपने समय निकाला..
    धन्यवाद.....

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  24. @ क्षमाप्रार्थी हूँ ..शरद कोकास जी...
    वर्तनी की त्रुटि हुई है...
    कृपा करके 'कोकास' पढ़ें..
    धन्यवाद..

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